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December, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भड़काऊ फिल्‍म-सामग्री पर प्रतिबन्‍ध हो

दिल्‍ली बस बलात्‍कार मामले में प्रधानमंत्री ने अपने ताजा सम्‍बोधन में कहा कि पुलिस की सेवाओं में महिला सुरक्षा शीर्ष पर होनी चाहिए। अपने आवास पर आईपीएस प्रोबेश्‍नर्स के समूह से मुखातिब होते हुए मनमोहन सिंह ने सामूहिक बलात्‍कार जैसे जघन्‍य अपराधों में लोग शामिल क्‍यों होते हैं, यह पता लगाने के लिए व्‍यवहारगत और मनोचिकित्‍सकीय अध्‍ययनों पर जोर देने की बात कही। उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि हम ऐसे समय में हैं, जहां चहुं ओर तनाव बढ़ रहा है। यदि प्रधानमंत्री को यह अहसास है कि हम भारतीय तनावों से घिरे हुए हैं तो स्‍वाभाविक रुप से उन्‍हें इसका ज्ञान भी होना चाहिए कि बलात्‍कार या सामूहिक बलात्‍कार के जघन्‍य अपराधों से लेकर हिंसा, मारकाट, लूट-खसोट, गुंडागर्दी, बदमाशी समाज में क्‍यों व्‍याप्‍त है। देश के प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित व्‍यक्ति यदि बलात्‍कार जैसी घटनाओं के कारणों से अनभिज्ञ है तो यह बड़ी ही हास्‍यास्‍पद स्थिति है। घटनाओं और दुर्घटनाओं के बाद उन पर रोना, दुख प्रकट करना भारतीय सत्‍ता के शीर्षस्‍थ नेताओं की स्‍वाभाविक प्रवृत्ति रही है लेकिन हर सामाजिक गतिविधि को पेशेवर बनाने और हर भारतीय…