सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रेरणादायी पहल: हिन्दुस्तान में 'विचार बिन्दु'

प्रेरणादायी पहल: हिन्दुस्तान में 'विचार बिन्दु'

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आप भला तो जग भला

अकसर हम समाज और इसके भौतिक-अभौतिक व्‍यवहारों से स्‍वयं को दुखी करते हैं।हम सोचते हैं कि स्थितियां,घटनाएं और आयोजन हमारे अनुकूल हों। ये हमारेअनुसार उपस्थित हों। कोई भी मनुष्‍य सकारात्‍मक अपेक्षा के साथ ऐसा होने कीकल्‍पना करता है। और ऐसी कल्‍पना के मूल में हर वस्‍तु व प्रत्‍येकसामाजिक व्‍यवहार सदभावना के साथ मौजूद रहता है। लेकिन क्‍या हमारेमनोत्‍कर्ष के लिए चीजें,घटनाएं बदल जाएंगी?निसन्‍देह ऐसा नहीं होगा। अपनी अपेक्षा के अनुरूप चीजोंके न होने,घटनाओं के न घटनेका दुखभाव भूलने के लिए कुछ दिनों तक आप अपने परिवेश से दूर चले जाएं। आपका अपने शहर,घर और पास-पड़ोस से एक माह तक कोई सम्‍पर्क न हो। महीनेभर बाद वापस आने पर आप क्‍या पाते हैं, यही कि कुछ नहीं हुआ। आपके मन मुताबिक कुछ नहीं बदला। सब कुछ पहले जैसा ही है। शहर, घर और पास-पड़ोस आपकी अनुपस्थिति में भी अपनी अच्‍छाईयों-बुराईयों के साथ पूर्ववत हैं। जब आपकी अस्‍थायी अनुपस्थिति से अपके परिवेश में बदलाव नहीं आया और वापस ऐसे परिवेश में आकर आपको इसका भान भी हो गया, तोफिरअपनी इच्‍छापूर्ति न होने का दुख हमेंक्‍यों हो? क्‍यों हमको यह महसूस हो कि अमुक ची…

अन्‍धविश्‍वास छोड़ आत्‍मविश्‍वास अपनाएं

अन्‍धश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्‍यक्ष मराठी समाजसेवी नरेन्‍द्र दाभोलकर की हत्‍या। उन्‍हें निकट से गोली मारी गई। वे धर्माडम्‍बरी, अन्‍धविश्‍वासी लोगों को जीवन को वास्‍तविकता के धरातल पर देखने के लिए प्रेरित करते थे। आज के आम आदमी को किस दिशा में सोचनेवाला कहें। वह अपनी सुरक्षा के लिए धार्मिक कुरीतियों के हवाले है या वो अपनी नजर में मौजूद अपनी उन गलतियों से आत्‍मविनाशी हो-हो कर धर्मतन्‍त्र के तकाजे में अपने व्‍यक्तित्‍व को बदलने की सोचता है, जो वह बचपन से लेकर अब तक करता आ रहा है। ऐसे व्‍यक्तियों को यदि यथार्थपरक दृष्टि से सम्‍पूर्ण नरेन्‍द्र दाभोलकर जैसा व्‍यक्ति जीवन को उस रुप में जीने को प्रेरित करे, जिस रुप में वह है या हो सकता है तो निसन्‍देह धर्म के ठेकेदारों को इससे अपनी दूकानों के बन्‍द होने का डर सताने लगता है। परिणामस्‍वरुप वे दाभोलकर जैसे जमीनी और यथार्थवादियों को या तो मृत्‍यु दे देते हैं या उन्‍हें इस प्रकार प्रताड़ित करते हैं कि वे जीते जी मौत के कब्‍जे में पहुंच जाते हैं। बात केवल समाजसेवी की मौत पर दुख मनाने या अन्‍धविश्‍वास की दूकानें चलानेवालों के दुस्‍साहस के जीत की न…

त्‍यौहार और उपलब्धियों से भरा दिवस

वैसे तो लोग एक दिन की बातों और उपलब्धियों को अगले दिन से भूलने लगते हैं। लेकिन एक दिन की इन उपलब्धियों पर अगर सिर्फ एक दिन जीवन जीने वालों के हिसाब से सोचा जाए तो यह एक दिन बहुत बड़ा जाता है। यह दिन जीवन से भी विशाल हो जाता है। अचानक इसका आकार इतना बढ़ जाता है कि इस एक दिन की बातें, घटनाएं और उपलब्धियां इतिहास बन जाया करती हैं। आज का दिन ऐसा ही था। विशेषकर भारतीय लोगों के लिए यह दिन खेलों की सबसे बड़ी वैश्विक प्रतियोगिता ओलम्पिक खेल में अत्‍यंत महत्‍त्‍वपूर्ण रहा। आज भारतीय कुश्‍ती की महिला पहलवान साक्षी मलिक ने ओलंपिक प्रतियोगिता में तीसरा स्‍थान प्राप्‍त कर तांबे का पदक जीता। इसके बाद बैड‍मिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने ब्राजील के रिया डी जेनेरियो में चल रहे ओलंपिक खेलों की बैडमिंटन प्रतिस्‍पर्द्धा के सेमि फाइनल में जापान की खिलाड़ी नोजोमी ओकूहारा कोसीधे सेटों में 21-19 और 21-10 से हराकर इस प्रतिस्‍पर्द्धा के फाइलन में स्‍थान पक्‍का कर लिया। इस विजय के साथ सिंधू ने भारत के लिए महिला बैडमिंटन में रजत पदक सुनिश्चित कर लिया। यदि पीवी सिंधू फाइनल में भी विजय प्राप्‍त करती हैं तो वे ओलंपिक में बैड…