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अन्‍धविश्‍वास छोड़ आत्‍मविश्‍वास अपनाएं

अन्‍धश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्‍यक्ष मराठी समाजसेवी नरेन्‍द्र दाभोलकर की हत्‍या। उन्‍हें निकट से गोली मारी गई। वे धर्माडम्‍बरी, अन्‍धविश्‍वासी लोगों को जीवन को वास्‍तविकता के धरातल पर देखने के लिए प्रेरित करते थे। आज के आम आदमी को किस दिशा में सोचनेवाला कहें। वह अपनी सुरक्षा के लिए धार्मिक कुरीतियों के हवाले है या वो अपनी नजर में मौजूद अपनी उन गलतियों से आत्‍मविनाशी हो-हो कर धर्मतन्‍त्र के तकाजे में अपने व्‍यक्तित्‍व को बदलने की सोचता है, जो वह बचपन से लेकर अब तक करता आ रहा है। ऐसे व्‍यक्तियों को यदि यथार्थपरक दृष्टि से सम्‍पूर्ण नरेन्‍द्र दाभोलकर जैसा व्‍यक्ति जीवन को उस रुप में जीने को प्रेरित करे, जिस रुप में वह है या हो सकता है तो निसन्‍देह धर्म के ठेकेदारों को इससे अपनी दूकानों के बन्‍द होने का डर सताने लगता है। परिणामस्‍वरुप वे दाभोलकर जैसे जमीनी और यथार्थवादियों को या तो मृत्‍यु दे देते हैं या उन्‍हें इस प्रकार प्रताड़ित करते हैं कि वे जीते जी मौत के कब्‍जे में पहुंच जाते हैं। बात केवल समाजसेवी की मौत पर दुख मनाने या अन्‍धविश्‍वास की दूकानें चलानेवालों के दुस्‍साहस के जीत की न…